भारत आज विश्व के सबसे युवा देशों में से एक है। देश की लगभग 65% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह जनसांख्यिकीय शक्ति देश के विकास की सबसे बड़ी पूँजी है। लेकिन इसी युवा शक्ति के बीच नशाखोरी (Substance Abuse) और उससे जुड़े अपराध तेजी से बढ़ते हुए एक गंभीर सामाजिक, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था चुनौती के रूप में सामने आए हैं।
शराब, सिंथेटिक ड्रग्स, ओपिओइड, इंजेक्शन ड्रग्स, प्रिस्क्रिप्शन दवाओं का दुरुपयोग और पार्टी ड्रग्स का प्रसार न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की सुरक्षा पर भी असर डालता है।
NCRIB Foundation इस समस्या को केवल नशामुक्ति का विषय नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य + अपराध रोकथाम + युवा संरक्षण से जुड़ी राष्ट्रीय चुनौती मानते हुए देशभर में जागरूकता और रोकथाम के लिए कार्यरत है।
भारत में नशाखोरी की वर्तमान स्थिति
राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न अध्ययनों के अनुसार:
- लगभग 16 करोड़ लोग भारत में शराब का सेवन करते हैं
- 5–6 करोड़ लोग निर्भरता की स्थिति में हैं
- 3 करोड़ से अधिक लोग कैनाबिस का उपयोग करते हैं
- 2 करोड़ से अधिक ओपिओइड उपयोगकर्ता
- 1 करोड़ से अधिक लोग नशीली दवाओं का दुरुपयोग
नशे की शुरुआत अधिकतर 18–25 वर्ष की आयु में होती है, जिससे युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होता है।
युवाओं पर प्रभाव
युवाओं में नशाखोरी के कारण:
- पढ़ाई में गिरावट
- मानसिक तनाव
- बेरोजगारी
- अपराध की ओर झुकाव
- सामाजिक अलगाव
युवा वर्ग में नशे का प्रसार राष्ट्र की उत्पादक क्षमता को प्रभावित करता है।
नशाखोरी और अपराध का संबंध
नशाखोरी और अपराध के बीच स्पष्ट संबंध देखा गया है:
- घरेलू हिंसा
- सड़क दुर्घटनाएँ
- चोरी और लूट
- सार्वजनिक हिंसा
- ड्रग तस्करी
नशे की स्थिति व्यक्ति की निर्णय क्षमता और व्यवहार नियंत्रण को प्रभावित करती है।
ड्रग्स से होने वाली प्रमुख बीमारियाँ
1. लीवर रोग
- लिवर सिरोसिस
- हेपेटाइटिस
- लिवर फेलियर
2. हृदय रोग
- हार्ट अटैक
- स्ट्रोक
- रक्तचाप असंतुलन
3. मानसिक स्वास्थ्य
- अवसाद
- चिंता
- आत्महत्या का जोखिम
- आक्रामक व्यवहार
4. इंजेक्शन ड्रग्स से संक्रमण
- HIV/AIDS
- Hepatitis B और C
- TB
- रक्त संक्रमण
नशाखोरी-बीमारी-अपराध चक्र
नशा → स्वास्थ्य गिरावट → आर्थिक संकट → अपराध → सामाजिक विघटन
इस चक्र को रोकना अत्यंत आवश्यक है।
NCRIB Foundation की भूमिका
1. जागरूकता अभियान
- स्कूल और कॉलेज कार्यक्रम
- एंटी-ड्रग सेमिनार
- युवा संवाद
- रैलियाँ
2. स्वास्थ्य जागरूकता
- ड्रग्स से होने वाली बीमारियों पर कार्यक्रम
- मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग
- स्वास्थ्य शिविर
3. पुनर्वास सहयोग
- नशामुक्ति केंद्रों से जोड़ना
- परिवार परामर्श
- सामाजिक पुनर्स्थापन
4. युवा सशक्तिकरण
- जीवन कौशल प्रशिक्षण
- खेल अभियान
- करियर मार्गदर्शन
5. सामुदायिक सहभागिता
- अभिभावक जागरूकता
- स्वयंसेवक नेटवर्क
- प्रशासन सहयोग
रोकथाम रणनीति
प्राथमिक रोकथाम:
स्कूल शिक्षा, जागरूकता अभियान, खेल
द्वितीयक:
जोखिम युवाओं की पहचान, मानसिक सहायता
तृतीयक:
पुनर्वास, रोजगार सहायता
भविष्य की दिशा
NCRIB Foundation आगे:
- राष्ट्रीय एंटी-ड्रग अभियान
- डिजिटल जागरूकता
- हेल्पलाइन
- युवा कार्यक्रम
- शोध आधारित कार्य
को और मजबूत करेगा।
निष्कर्ष
नशाखोरी और ड्रग्स-जनित बीमारियाँ भारत के लिए गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और अपराध चुनौती हैं।
इस समस्या का समाधान जागरूकता, उपचार, नीति और सामुदायिक सहयोग के संयुक्त प्रयास से ही संभव है।
NCRIB Foundation नशामुक्त और सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
हमारा संकल्प
नशामुक्त युवा
स्वस्थ भारत
सुरक्षित समाज
लेखक: NCRIB Foundation
